2026 में इन 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव, जानिए किस राज्य में किस पार्टी की है सरकार

नईदिल्ली 
भारतीय राजनीति के लिए 2026 का साल बेहद अहम रहने वाला है। अगले कुछ ही महीनों में देश के 5 राज्यों असम, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और केरल में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ये चुनाव भले ही विधानसभा के लिए हो रहे हों, पर राष्ट्रीय राजनीति को भी बहुत मजबूती से प्रभावित करेंगे। एक तरफ भारतीय जनता पार्टी अपनी सत्ता को कई नए राज्यों में स्थापित करने की कोशिश में है, तो दूसरी तरफ विपक्ष, खासकर कांग्रेस और क्षेत्रीय दल, देश की सबसे बड़ी पार्टी को कोई मौका नहीं देना चाहते हैं। ये विधानसभा चुनाव काफी हद तक ये भी बताने में कामयाब होंगे कि मोदी सरकार की नीतियां कितनी असरदार हैं और विपक्ष कितना एकजुट है। आइए, एक-एक करके इन राज्यों की मौजूदा सरकार, सियासी हालात और चुनावों की अहमियत पर नजर डालते हैं।

1: पश्चिम बंगाल में ममता के सामने बड़ी चुनौती

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस की सरकार है, जिसने 2021 के विधानसभा चुनावों में 213 सीटें जीतीं और 48% वोट शेयर हासिल किया। ममता की लोकप्रियता और कल्याण योजनाएं उनकी ताकत हैं, लेकिन आर्थिक चुनौतियां और गवर्नेंस के विवाद उनकी सरकार पर भारी पड़ सकते हैं। बीजेपी 2021 में 77 सीटों तक पहुंची थी और अब बिहार में बड़ी जीत के बाद काफी आक्रामक है। कांग्रेस यहां कमजोर हो चुकी है और नेतृत्व के अभाव से जूझ रही है। अगर बीजेपी बंगाल में कुछ अच्छा कर जाती है तो यह उसकी राजनीति के लिए एक बहुत बड़ा बूस्ट साबित हो सकता है। वहीं, TMC की हार उसे उन क्षेत्रीय पार्टियों की लिस्ट में डाल सकती है जो एक समय किसी राज्य में बहुत ताकतवर थीं लेकिन धीरे-धीरे कमजोर होती चली गईं।

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2: असम में बीजेपी ने बनाई है मजबूत पकड़

असम में फिलहाल हिमंत विश्व शर्मा के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार है। 2021 के चुनाव में बीजेपी गठबंधन ने 75 सीटें जीतीं और अब लगातार तीसरी बार सत्ता में आने की तैयारी कर रहा है। शर्मा ने पिछले कुछ सालों में बीजेपी के फायरब्रांड नेता के साथ-साथ एक ऐसे लीडर की छवि बनाई है जो विकास, सुरक्षा और पहचान की राजनीति पर जोर देता है। वहीं, विपक्ष में कांग्रेस गौरव गोगोई के नेतृत्व में अपनी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार है। मुस्लिम वोटों के दम पर अपनी ताकत का प्रदर्शन करने वाली AIUDF जैसी पार्टियां भी आने वाले विधानसभा चुनावों में काफी कुछ तय करेंगी। ये चुनाव बीजेपी के लिए पूर्वोत्तर में अपनी पकड़ मजबूत करने का मौका है, तो वहीं अगर कांग्रेस यहां अच्छा करती है तो विपक्ष के लिए बड़ा बूस्ट होगा।

3: तमिलनाडु में नए चेहरों से होगी DMK की जंग

तमिलनाडु में एम.के. स्टालिन के नेतृत्व में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम यानी कि DMK सरकार है, जिसने 2021 में 234 में से 133 सीटें जीतीं थीं। इस सूबे में चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं से 1.86 करोड़ लोग लाभान्वित हुए हैं और पार्टी करीब 2.5 करोड़ वोटों का लक्ष्य लेकर चल रही है। हालांकि बेरोजगारी जैसे मुद्दे पार्टी पर भारी पड़ सकते हैं और एंटी-इनकंबेंसी फैक्टर तो है ही। वहीं, दूसरी तरफ AIADMK-बीजेपी गठबंधन भी अपना पूरा दम लगाए हुए है, जबकि विजय की TVK नई पार्टी के रूप में युवाओं को आकर्षित कर रही है। तमिलनाडु में जीत बीजेपी के लिए ऑर्गेनिक ग्रोथ का बड़ा मौका हो सकती है, जहां हिंदुत्व की सीमाएं हैं। वहीं, विपक्ष के लिए DMK की हार INDIA ब्लॉक को कमजोर करेगी।

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4: केरल में फिर से जाग गई है कांग्रेस की उम्मीद

केरला में पिनाराई विजयन की लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी कि LDF की सरकार है, जिसने 2021 में 99 सीटें जीतीं। यह गठबंधन एक बार फिर सत्ता में वापसी चाहता है लेकिन पिछले कुछ महीने इसके लिए अच्छे नहीं रहे हैं। विजयन सरकार का सामाजिक कल्याण और विकास पर जोर है, लेकिन आर्थिक चुनौतियां और मुख्यमंत्री की ऑटोक्रेटिक स्टाइल एक बड़ा माइनस पॉइंट है। 2025 स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस-UDF ने अच्छा प्रदर्शन किया, जो LDF के लिए चिंता की बात है। वहीं, बीजेपी ने भी इन चुनावों में अच्छा प्रदर्शन किया है और वह अपने पिछले प्रदर्शन से बेहतर करने की कोशिश में है। कुल मिलाकर इन चुनावों में लेफ्ट, कांग्रेस और बीजेपी, तीनों का बहुत कुछ दांव पर लगा हुआ है।

5: NDA के लिए आसान नहीं होगी पुडुचेरी में वापसी

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पुडुचेरी में एन. रंगासामी के नेतृत्व में ऑल इंडिया एन.आर. कांग्रेस यानी कि AINRC और बीजेपी का गठबंधन सत्ता में है। 2021 में 30 सीटों वाली विधानसभा में AINRC ने 10 और बीजेपी ने 6 सीटें जीती थीं, लेकिन फिलहाल गठबंधन में सब कुछ अच्छा होता नहीं दिख रहा। विपक्ष में DMK और कांग्रेस जैसी पार्टियां इस छोटे लेकिन महत्वपूर्ण केंद्र शासित प्रदेश की सत्ता पर अपना दावा मजबूती से पेश करती दिख रही हैं। लोकल गवर्नेंस और विकास के मुद्दे प्रमुख हैं, ऐसे में ये चुनाव बीजेपी के लिए दक्षिण में गठबंधन बचाने का टेस्ट है, जहां एंटी-इनकंबेंसी है। वहीं, अगर कांग्रेस और DMK की फिर से हार होती है तो उनके लिए पुडुचेरी में अपना संगठन बचाना मुश्किल हो सकता है।

बीजेपी के लिए सुनहरा मौका हैं ये विधानसभा चुनाव

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि इन 5 राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव बीजेपी के लिए दक्षिण और पूर्व में विस्तार का सुनहरा मौका हैं, जहां वह हिंदुत्व और मोदी ब्रांड पर दांव लगा रही है। 2025 में दिल्ली और बिहार में जीत से उसका मनोबल ऊंचा है। विपक्ष के लिए ये बाउंस बैक का टेस्ट हैं, और लेफ्ट की हार से INDIA ब्लॉक कमजोर हो सकता है, जबकि कांग्रेस की जीत उसे नई ऊर्जा देगी। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि 2026 के नतीजे 2029 के लोकसभा चुनावों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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